कोरोना वायरस से बचने के लिए इन दिनों लोग बहुत से लोग घर पर काढ़ा बनाकर पी रहे हैं। कुछ दफ्तरों में चाय की जगह काढ़ा दिया जा रहा है और कई जगह काढ़े का मुफ्त वितरण भी किया जा रहा है। आयुर्वेद के अनुसार काढ़ा पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और सदियों से उपचार आदि में इसका प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन हाल में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (All India Institute of Ayurveda) ने बताया कि काढ़ा पीने से भी आपको कुछ नुकसान हो सकते हैं। अक्सर लोग ये मानते है कि देसी ईलाज और काढ़े से किसी प्रकार के साइड इफेक्ट्स नहीं होते। लेकिन आपका बता दें यदि आपने सही विधि से काढ़ा नहीं बनाया तो इससे कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।
काढ़े में आमतौर पर काली मिर्च, सौंठ, अदरक, जायफल, दालचीनी और लौंग आदि का इस्तेमाल किया जाता है। ये सभी चीजे गर्म तासीर वाली होती है और इनके अधिक सेवन से मुँह में छाले, पेट में और सीने में जलन जैसी कुछ समस्याएं हो सकती है। खाली पेट काढ़े का सेवन करने से उल्टी आ सकती है। आयुष मंत्रालय द्वारा भी लोगों को काढ़ा पीने की सलाह दी जा रही है और उन्होंने इसे बनाने की विधि भी बताई है। इसके अलावा कुछ लोग त्रिकुट काढ़े का इस्तेमाल भी कर रहे हैं।
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एक व्यक्ति को एक समय में 5 ग्राम से अधिक त्रिकुट काढ़े का सेवन नहीं करना चाहिए। जिन लोगों को पित्त की समस्या रहती है, वे काढ़े को कम देर के लिए पकाएं। इसके अलावा गर्मी के मौसम में काढ़े की तासीर को ठंडा करने के लिए आप उसमें गिलोय, मुलेठी, मुनक्का और इलायची डालकर ठंडा कर सकते हैं। जिस दिन आपका उपवास हो तो उस दौरान काढ़े का सेवन ना करें। यदि काढ़े के सेवन से आपके मुँह में छाले पड़ गए हैं तो पान के पत्तों का और छाछ का सेवन अधिक करें, इससे छालों में राहत मिलेगी और ये जल्द ही ठीक भी हो जाएंगे।



