बिहार विधानसभा चुनाव में हो रहा है परिवार का पूरा प्रयोग, कहीं ससुर और दामाद, कहीं समधी-समधन ठोक रहे हैं ताल

बिहार की राजनीति में परिवारवाद और ज्यादा उभर कर सामने आ रहा है। इस चुनाव में इस बार 3 जोड़ी ससुर दामाद भी चुनाव लड़ रहे हैं। यह सभी छह अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

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बिहार में हमेशा ही जातिवाद और परिवारवाद का बोलबाला रहा है। भारतीय राजनीति में परिवारवाद के हजारों उदाहरण है। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह की पूरी पार्टी केवल और केवल परिवारवाद का उदाहरण है ना कि समाजवाद का। बिहार में लालू प्रसाद यादव का पूरा परिवार राजनीति करता है, अब बिहार विधानसभा चुनाव में 3 जोड़ी ससुर और दामाद चुनाव लड़ रहे हैं। यह बिहार की 6 विधानसभा सीटों से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें एक जोड़ी ससुर और दामाद एक ही दल और एक ही जिले के हैं, एक जोड़ी एक ही दल तथा अलग-अलग जिलों से प्रत्याशी हैं, वहीं ससुर दामाद की तीसरी जोड़ी दो दलों से संबंधित है तथा दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं। यह ससुर दामाद जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल तथा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रत्याशी हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी गया जिले की इमामगंज सीट से चुनाव लड़ रहे हैं तो उनके दामाद देवेंद्र मांझी को जहानाबाद जिले की मखदुमपुर सीट से चुनावी मैदान में उतारा गया है। इसके अलावा जीतन राम मांझी की समधन ज्योति देवी भी बाराचट्टी से चुनावी मैदान में है।

इसके अलावा सरकार में विधि मंत्री और लगातार 25 साल से विधानसभा जाने वाले नरेंद्र नारायण यादव मधेपुरा जिले की अलग नगर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं तो उनके दामाद निखिल मंडल मधेपुरा से जेडीयू के प्रत्याशी हैं। उसी तरह पूर्व मंत्री चंद्रिका राय और उनके दामाद लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के रिश्ते भले ही खराब हो गए हो लेकिन दोनों ही अपनी-अपनी किस्मत बिहार विधानसभा चुनाव में आजमा रहे हैं। चंद्रिका राय अपनी पुश्तैनी शिव प्रसाद से चुनावी मैदान में एंट्री की है तो उनके दामाद तेज प्रताप यादव राजद के टिकट पर समस्तीपुर के हसनपुर से चुनाव लड़ने को तैयार हुए हैं।

वही एक ही दल से एक पति पत्नी भी चुनावी मैदान में उतरे हैं। जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर विधायक कौशल यादव नवादा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं तो उनकी पत्नी पूर्णिमा देवी गोविंदपुर सीट से चुनाव लड़ रही है 2015 के चुनाव में पूर्णिमा ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और भारी मतों से विजय प्राप्त की थी। दो चचेरे भाई अलग-अलग दलों से भी इस बिहार विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ रहे हैं। जदयू के टिकट पर ओबरा से सुनील कुमार तो वह से राजद के टिकट पर उनके भाई भीम कुमार सिंह मैदान में उतरे हैं। बिहार विधानसभा 2020 में बिहार विधानसभा में परिवाद वाद का पूरा प्रतिबिंब देखने को मिल रहा है।

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