100 करोड रुपए की वसूली वाली घटना ने अब महाराष्ट्र की महा विकास आघाडी की सरकार को खिला दिया है। महा विकास आघाडी के दल चाहे कितने भी दावे कर रहे हो कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है लेकिन सच बात तो यह है कि इसी सरकार के सभी प्रमुख दल अब आपस में सामंजस्य स्थापित नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी तथा अन्य विपक्षी दल भी इस घटना को लेकर महा विकास आघाडी की सरकार पर निशाना साध रहे हैं। इसी बीच खुद शिवसेना ने भी गृह मंत्री अनिल देशमुख की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अपने मुख्य पत्र सामना में कई प्रमुख बातें कहीं हैं।
मुख्य पत्र सामना में लिखा गया, “अनिल देशमुख ने कुछ सीनियर अफसरों से बेवजह पंगा लिया। गृहमंत्री को कम-से-कम बोलना चाहिए। बेवजह कैमरे के सामने जाना और जांच का आदेश जारी करना अच्छा नहीं है।‘सौ सुनार की एक लोहार की’ ऐसा बर्ताव गृहमंत्री का होना चाहिए
पुलिस विभाग का नेतृत्व सिर्फ ‘सैल्यूट’ लेने के लिए नहीं होता है।वह प्रखर नेतृत्व देने के लिए होता है। प्रखरता ईमानदारी से तैयार होती है, ये भूलने से कैसे चलेगा?”
सामना में कहा गया है,”मनसुख हिरेन और एंटीलिया मामले में राज्य सरकार ने मुंबई पुलिस के आयुक्त परमबीर सिंह का तबादला कर दिया। परमबीर सिंह महत्वाकांक्षी अधिकारी हैं। होमगार्ड महासंचालक के पद पर किए गए तबादले को वो सहन नहीं कर पाए। गृह मंत्री ने उनकी उस अवस्था में तेल डाला। पुलिस आयुक्त ने गलतियां कीं इसलिए उन्हें जाना पड़ा, ऐसा एक बयान अनिल देशमुख के देने के बाद ही परमबीर सिंह ने उन पर 100 करोड़ वसूली का आरोप लगा दिया। आरोप लगा कि गृह मंत्री ने मनसुख हिरेन की हत्या का आरोपी सचिन वाजे को वसूली का टारगेट दिया था। ”
शिवसेना के द्वारा कहा गया है, “सचिन वाजे अब एक रहस्यमयी मामला बन गया है। पुलिस आयुक्त, गृहमंत्री, मंत्रिमंडल के प्रमुख लोगों का दुलारा और विश्वासपात्र रहा वाजे महज एक सहायक पुलिस निरीक्षक था। उसे मुंबई पुलिस का असीमित अधिकार किसके आदेश पर दिया गया, यह वास्तविक जांच का विषय है। मुंबई पुलिस आयुक्तालय में बैठकर वाजे वसूली कर रहा था और गृहमंत्री को इस बारे में जानकारी नहीं होगी?”



