जानिए जर्मनी से आकर जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाले, गौरव चौधरी की कहानी के बारे में, बिजनेसमैन से बने राजनेता

मेरठ के मूल निवासी गौरव चौधरी एक दशक तक जर्मनी में बिजनेस करके भारत लौटे हैं। और भारत में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीत लिया है।

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चित्र साभार: Live Hindustan

हम सभी जानते हैं कि लोग अपनी व्यक्तिगत उन्नति के लिए देश से बाहर जाकर विदेशों में काम करना पसंद करते हैं। लेकिन उसमें बहुत से ऐसे लोग भी होते हैं जो विदेशों में रहकर भी अपने वतन के प्रति अपनी वफादारी निभाते हैं और कुछ लोग एक निश्चित समय तक विदेशों में काम करके अपने वतन लौट जाते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति है मेरठ के मूल निवासी गौरव चौधरी। गौरव चौधरी ने लगभग एक दशक से ज्यादा समय तक जर्मनी में बिजनेस किया है और अब वे अपने वतन भारत में ही रहते हैं। जर्मनी से लौटने के बाद उन्होंने राजनीति में आने का प्रयास किया और भारतीय जनता पार्टी से वार्ड 18 के लिए टिकट मांगा। पार्टी नेताओं के विरोध के बाद भी उनकी योग्यता के कारण भाजपा ने उन्हें टिकट दिया। और वे बीजेपी के टिकट पर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत गए। भाजपा से पांच जीतने वालों में से वह एक हैं। शनिवार को वह निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हो गए।

गौरव चौधरी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना आदर्श मानते हैं। गौरव का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की छवि को समूचे विश्व में बदलकर रख दिया है। विदेशों में भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा उठ गया है। गौरव का फैमिली बैकग्राउंड हाई प्रोफाइल होने की वजह से उनके चुनाव लड़ने की खबर इलाके में चर्चा का विषय बनी। गौरव की पढ़ाई लिखाई कुरुक्षेत्र में हुई। वह बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद जर्मनी चले गए। वहीं पर इंपोर्ट, एक्सपोर्ट और कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया। वास्तव में गौरव जैसे युवाओं का भारत लौटना और भारत की राजनीति में कदम रखना एक अच्छा संकेत है।हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार गौरव चौधरी जब विदेश में रहते थे तो उन्होंने अपने गांव को कभी भी खुद से दूर नहीं होने दिया। बताते हैं कि वह साल में दो बार अपने गांव जरूर आते थे। गौरव चौधरी गांव में कई साल से अपने दादा चौधरी भीम सिंह मेमोरियल ट्रस्ट नाम से संस्था चला रहे हैं। ट्रस्ट के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों की मदद करते रहते हैं। जर्मनी में रहते हुए अपने गांव समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं। इसी जज्बे ने उन्हें जिला पंचायत का पहले सदस्य बनाया।

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