पिछले 2 महीनों से किसान आंदोलन सक्रिय है अब इसके खत्म होने का आसरा दिखाई दे रहा है। कुछ सूत्रों से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि विज्ञान भवन में गुरुवार को केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच चौथे दौर की लंबी चली वार्तालाप में पहली बार दोनों पक्षों के बीच विवादित मसलों पर सहमति बनी है।इस पर केंद्र सरकार ने किसान संगठनों की सभी प्रमुख मांगों पर विचार करने का पूर्णतः भरोसा दिलाया है। आगे यह भी माना जा रहा है कि सरकार कानूनों में संशोधनों पर विचार करने को पूरी तरह से सहमत गई है। अब इन सब प्रमुख मसलों पर शनिवार को फिर बैठक होगी जिसमें निर्णायक फैसला देखना को मिल सकता है।
शुरुआत में हालात तनावपूर्ण थे
कुछ सूत्रों से जानकारी मिली कि विज्ञान भवन में चौथे चरण में गुरुवार को बैठक के शुरुआती दो घंटे तनाव वाले थे, जिसमें किसान नेता अपनी बातों पर अड़िग अड़े हुए थे। बताया जा रहा था कि हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि किसान नेताओं ने सरकारी चाय तक को स्वीकार करने से मना कर दिया था। उन्होंने अपने साथ लाई चाय ही पी। हालांकि जैसे ही कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एपीएमसी पर अपनी चर्चा में सरल और लचीला रुख अपनाया तो माहौल पूरी तरह से बदल गया। सरकार की तरफ से तीनों मंत्रियों ने न सिर्फ एपीएमसी को मजबूत बनाने की बात कही बल्कि उसके दायरे में अधिक से अधिक किसानों को भी शामिल कराने की बात कही।
किसान समाधान को प्रतिबद्ध हुयी सरकार
आपको बता दे कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बैठक में किसानों की चिंता वाले बिंदुओं को चिन्हित किया और कहा कि सरकार उनके समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार सभी मुद्दों पर खुले मन से विचार कर रही है। नये कानूनों से कृषि उत्पाद विपणन समिति के अस्तित्व पर किसान नेताओं से खतरे की आशंका भी जताई है। उन्होंने आगे कहा कि नए कानून में मंडी की सीमा से बाहर प्राइवेट मंडियां आएंगी, जिसमें दोनों प्रकार की मंडियों में समानता लाने पर सरकार विचार करेगी साथ ही सरकार बाहरी कारोबार करने वालों के रजिस्ट्रेशन और पैन कार्ड पर कारोबार करने की छूट पर भी विचार किया जाएगा।



