वैश्विक महामारी कोरोना ने एक तरह जहाँ देश को हर क्षेत्र में काफी पीछे धकेल दिया है तो वहीं संकट के इस समय में भी विपक्ष देश को शर्मिंदा करने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ रहा। एक ऐसे ही विवाद ने एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है और इस विवाद को नाम दिया गया है ‘टूलकिट’। 18 मई को भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह ‘टूलकिट’ का इस्तेमाल कर कोरोना वायरस संकट के वक्त फायदा उठाकर पीएम नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल कर रही है। हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए भाजपा के कई नेताओं के खिलाफ FIR करने की मांग तक कर दी है।
आखिर ये टूलकिट विवाद है क्या? और भाजपा द्वारा वायरल की गई कांग्रेस की इस टूलकिट में आखिर ऐसा क्या है जिसने कांग्रेस की रातों की नींद तक उड़ा कर रख दी है। आइए आपको संक्षिप्त में बताते है।
क्या होती है टूलकिट?
टूलकिट को एक तरह से प्लानिंग के तौर पर देखा जा सकता है। इसमें मूल रूप से यह किसी भी आंदोलन को ऑनलाइन या ऑफलाइन चलाने की प्लानिंग भर होती है। या यूं कहें कि टूलकिट उन तमाम जानकारियों का संग्रह होता है जिससे किसी मुद्दे को समझने और उसके प्रचार-प्रसार में मदद मिलती है। टूलकिट में आमतौर पर आंदोलन को बढ़ाने के लिए ‘एक्शन पॉइंट्स’ होते हैं। इसमें यह बताया जाता है कि आप क्या लिखें, कौन से हैशटैग का इस्तेमाल करें, कब ट्वीट या पोस्ट करें और किन लोगों को शामिल करें।
कांग्रेस की टूलकिट में ऐसा क्या?
अब बात करते हैं कांग्रेस पार्टी की टूलकिट की जिसमें कार्यकर्ताओं से सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस के ‘इंडियन स्ट्रेन’ को ‘मोदी स्ट्रेन’ और ‘सुपर स्प्रेडर कुम्भ’ जैसे शब्दों और वाक्यों का इस्तेमाल किया। ये 2 शब्द इस पूरे विवाद को स्पष्ट करने के लिए काफी है कि किस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि और मौजूदा सरकार को बदनाम करने का एजेंडा चलाया जा रहा है।
इस टूलकिट में और क्या?
‘मोदी स्ट्रेन’ और ‘सुपर स्प्रेडर कुम्भ’ जैसे शब्दों के अलावा इस टूलकिट में कई ऐसी चीज़ें जिसे सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ एक पूरी रणनीति कहा जा सकता है। जैसे कोरोना हमारे लिए मौका है, मोदी की इमेज को बर्बाद कर दो। मोदी-बीजेपी सपोर्टर दिखने वाले हैंडल्स से हमला करो। यह भी कहा गया है कि कुंभ और ईद के बीच में आने से बचें क्योंकि बीजेपी इसका काउंटर करेगी। कुंभ को सुपर स्प्रेडर और ईद को सोशल गैदरिंग बताओ। सबसे बड़ा हथियार कोरोना काल में शमशान घाटों में जली लाशों की तस्वीरों को विदेशी मीडिया तक पहुंचाया जाए और मोदी सरकार पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर से हमला हो। टूलकिट में अस्पतालों में बेड और अन्य सुविधाओं की जमाखोरी की बात भी कही गई है।
एक पार्टी का सबसे बड़ा हथियार टूलकिट
अब आप समझ गए होंगे कि मामूली सा शब्द टूलकिट किसी पार्टी के लिए कितना बड़ा हथियार साबित हो सकता है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल लगभग सभी वर्ग के लोग करते है, जिसमें युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा है। इनमें कुछ फर्स्ट टाइम वोटर्स भी हैं जिनमे से कुछ को राजनीति की समझ बिल्कुल भी नहीं है। अब ऐसे ही वोटरों और सालों से एक पार्टी के लिए मतदान कर रहें लोगों को टूलकिट के जरिये बरगलाया जाता है।



