कोरोना की जंग में गेम चेंजर साबित हुआ योगी सरकार का यूपी मॉडल, क्या अन्य राज्यों को नहीं लेनी चाहिए थी सीख?

योगी सरकार के यूपी मॉडल ने ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण पर काबू पाने में अहम भूमिका निभाई है। यूपी मॉडल की तारीफ WHO और नीति आयोग ने भी की है।

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चित्र साभार: ट्विटर @CMOfficeUP

जनसंख्या के आधार पर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य माना जाता है। करीब 24 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथों में है। देश में वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर ने जब दस्तक दी तो लगभग हर किसी ने यही मान लिया था कि यूपी में हालात सबसे पहले बेकाबू होंगे। कुछ लोग तो शायद इस समय का इंतजार भी कर रहे थे। एक तरफ जहां कुछ राज्य केंद्र सरकार के साथ आरोप-प्रत्यारोप के सिलसिले को जारी रखने में व्यस्त थे तो वहीं योगी सरकार ने यूपी मॉडल के तहत अपने राज्य की तस्वीर ही बदल कर रख दी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ देश के नीति आयोग ने भी कोविड प्रबंधन के लिए उत्तर प्रदेश के योगी सरकार के मॉडल की जमकर तारीफ की। उन्होंने ये तक कह दिया कि अन्य राज्यों को यूपी से सीख लेनी चाहिए।

ट्रेस, टेस्ट, ट्रीट का यूपी मॉडल

उत्तर प्रदेश खास कर राज्य के ग्रामीण इलाकों में कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए ट्रेस,टेस्ट,ट्रीट का फॉर्मूला कारगर साबित हुआ। राज्य में अब रिकवरी रेट 92 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य है जहां 4.55 करोड़ टेस्ट हुए हैं। ये मुख्यमंत्री योगी के यूपी मॉडल का ही नतीजा है। इस मॉडल पर काम करते हुए सरकार ने यूपी के ग्रामीण इलाकों में सामुदायिक केंद्रों, पंचायत भवनों और स्कूलों में कोरोना मरीजों की जांच और इलाज की सुविधा दी। कोविड मैनेजमेंट की इस पूरे अभियान पर नजर रखने के लिए योगी सरकार ने 21242 पर्यवेक्षकों की तैनाती की है। ग्रामीण इलाकों को कोरोना से बचाने और लोगों को जागरूक करने के लिए जिले के हर ब्लाक में कोविड जांच के लिए राज्य सरकार की ओर से 2 मोबाइल वैन तैनात की गई है।

ऑक्सीजन ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम भी सफल

यूपी मॉडल के तहत काम करने वाला योगी सरकार का ऑक्सीजन ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम भी सबसे सफल माना गया। केंद्र सरकार ने खुद इस मॉडल को लागू किया। यूपी ने ऑक्सीजन ट्रैकिंग के लिए एक ऐसा डैशबोर्ड तैयार किया है जिसके जरिए ऑक्सीजन टैंकरों की रियल टाइम लोकेशन पता लगा सकते हैं। इस मॉडल का नतीजा ये निकल कर सामने आया कि पहले जहां 250 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की उपलब्धता हो पा रही थी, अब 1000 मीट्रिक टन होने लगी है।

अन्य राज्यों के लिए सीख

योगी सरकार का यूपी मॉडल अन्य राज्यों के लिए सीख से कम नहीं है। क्योंकि कुछ राज्य ऐसे थे जिन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े करने के अलावा और कुछ नहीं किया। दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्य आबादी के लिहाज से कोरोना से बचाव के लिए काफी बेहतर उपाय कर सकते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगर आज ये राज्य यूपी सरकार का मॉडल अपनाते तो देश में हालात काफी बेहतर हो सकते थे।

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