समीर वानखेड़े की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को भेजा नोटिस, 7 दिनों के भीतर देना होगा जवाब

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने शुक्रवार को एनसीबी के जोनल निदेशक समीर वानखेड़े द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए लिखे पत्र पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। इस पत्र में सरकार से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है, जिसमें विफल रहने पर समन जारी किया जाएगा।

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एनसीबी के जोनल निदेशक समीर वानखेड़े नाम अब समाचारों में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से ज्यादा उछल रहा है। महाराष्ट्र सरकार और उनके बीच में तकरार खुलेआम देखी जा सकती है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग  ने शुक्रवार को समीर वानखेड़े द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए लिखे पत्र पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। इस पत्र के जारी होने के 7 दिनों के भीतर सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा अन्यथा कोर्ट समन भी जारी कर सकता है। आपको बता दें कि एनसीएससी के निदेशक एके साहू द्वारा गृह मंत्रालय के सचिव, महाराष्ट्र के मुख्य सचिव, डीजीपी और मुंबई पुलिस आयुक्त को संबोधित पत्र में वानखेड़े के प्रतिनिधित्व पर प्रतिक्रिया मांगी गई है।

पत्र में कहा गया है, “राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को समीर ज्ञानदेव वानखेड़े से दिनांक 26.10.2021 की शिकायत/सूचना प्राप्त हुई है। इसमें आयोग ने शक्तियों के अनुसरण में मामले की जांच करने का निर्णय लिया है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत यह शक्ति प्रदान की गई है।” इसमें सरकार से कहा गया है, “आपसे अनुरोध है कि इस नोटिस की प्राप्ति से 7 दिनों के भीतर या तो फैक्स/डाक/ईमेल द्वारा या व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत करें।”

आपको बता दें वानखेड़े ने आयोग को पत्र लिखकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक  द्वारा किए गए खुलासे के बाद उत्पीड़न का आरोप लगाया था। नबाब मलिक ने आरोप लगाते हुए कहा था कि वानखेड़े एक मुस्लिम थे और उन्होंने अनुसूचित जाति से होने का दावा करते हुए IRS की नौकरी प्राप्त की थी। मलिक ने आरोप लगाया था कि वानखेड़े के पिता का नाम दाऊद था न कि ज्ञानदेव। वहीं वानखेड़े ने सभी आरोपों से इनकार किया है।

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