हरियाणा उर्दू अकादमी में हुआ फर्जीवाड़ा, लेखकों के आतिथ्य सत्कार के नाम पर डकार गए लाखों रुपए

हरियाणा प्रदेश की उर्दू अकादमी में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस फर्जीवाड़े में आतिथ्य सत्कार के नाम 1507872 रूपये की गड़बड़ी की गई है। इस मामले में डॉक्टर नरेंद्र कुमार पर एफ आई आर दर्ज कर ली गई है अब विजिलेंस के डीएसपी ओमप्रकाश इसकी गहराई से जांच कर रहे हैं।

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भारत में भ्रष्टाचार का अपना ही बोलबाला रहा है। बदलते वक्त के साथ-साथ भ्रष्टाचार भी अपने चरम पर पहुंच चुका है। हरियाणा उर्दू अकादमी का नाम बीसी भ्रष्टाचार में शामिल हो गया है अकादमी ने 8 जनवरी को दिल्ली ज्वेलर्स से 31360रूपये का सामान खरीदा था और इसके बदले 31360रूपये दिए लेकिन सामान नहीं खरीदा गया। अकादमी ने सरकारी गाड़ी का 1 साल में दो बार बीमा कराया जिसकी एक बार की राशि 16219रूपये चालक प्रमोद ने प्राप्त की जबकि दूसरी राशि लेखाकार की ओर से तत्कालीन निदेशक को भेजी गई। इस मामले में बताया जा रहा है कि जितना भी पैसा लेखकों के आतिथ्य सत्कार पर खर्च होता हुआ बताया गया वह सभी निदेशक की जेब में जाता था। पूर्व निदेशक पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के मेडिकल बिल की राशि ले ली उन्होंने 39155रूपये अपने खाते में जमा कर लिए। इसके अलावा पूर्व निदेशक ने 18 अक्टूबर 2018 को 102495रूपये का एक यात्रा भत्ता अपने निजी खाते में जमा करा लिया और जिसकी सक्षम अधिकारी से कोई भी मंजूरी नहीं ली गई।

जांच में सामने आया है कि 2018 में 2 फरवरी को लेखकों के खाने-पीने किताबों के नाम पर 25470रूपये खर्च कर गए थे। 16 जुलाई को लेखक के नाम पर ही 14009 रूपये खर्च कर दिए गए चालक प्रमोद कुमार के नाम से चेक जारी किया गया। इसके बाद 8947रूपये का खर्चा सेवादार कपूरचंद के नाम पर चेक जारी करके दिखाया गया। विजिलेंस जांच में कपूर चंद ने बताया कि उसे न तो चेक मिला और ना ही वे ड्रॉ कराया उसने कोई सामान भी नहीं खरीदा यह बिल तत्कालीन निदेशक डॉक्टर नरेंद्र कुमार स्वयं लाए और उनके आदेश पर उन बिलों पर मैंने हस्ताक्षर किए।

हरियाणा प्रदेश की उर्दू अकादमी में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस फर्जीवाड़े में आतिथ्य सत्कार के नाम 1507872 रूपये की गड़बड़ी की गई है। इस मामले में डॉक्टर नरेंद्र कुमार पर एफ आई आर दर्ज कर ली गई है अब विजिलेंस के डीएसपी ओमप्रकाश इसकी गहराई से जांच कर रहे हैं।उन्होंने अपने पास यह चेक रख लिया और इस खर्च की भी अनुमति नहीं ली। 18 जुलाई को लेखकों के खाने-पीने के नाम पर 1605रूपये, 27436 रुपये, 43126 रुपये के तीन चेक जारी हुए। पहली दो राशि के चेक चालक प्रमोद कुमार के नाम जारी हुए और यह राशि वित्त अधिकारी निदेशक नहीं निकलवाई जबकि तीसरी राशि का चैक उन्होंने अपने खाते में जमा कराया और अगले दिन 47590रूपये का चेक दिखाकर चालक के नाम से जारी करा दिया गया।

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