आज 94 साल की उम्र में उर्दू के मशहूर शायर आनंद मोहन जुत्शी उर्फ गुलजार देहलवी का निधन हो गया। गुलजार देहलवी ने अभी कुछ ही दिन पहले शारदा अस्पताल से कोरोना को हराकर घर लौटे थे। मशहूर शायर आनंद मोहन जुत्शी ‘गुलजार’ का जन्म 7 जुलाई सन 1926 को हुआ था। एक महीने बाद में 94 साल की होने वाले थे। उर्दू शायरी में योगदान के लिए आनंद मोहन जुत्शी को पद्मश्री तथा मीर तकी मीर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। क्योंकि गुलजार का जन्म उस समय हुआ था जब भारत आजादी के लिए आंदोलन कर रहा था इसीलिए गुलजार की शायरी ने युवाओं में एक नई ऊर्जा का विस्तार किया। गुलजार देहलवी की शायरी के पंडित नेहरू भी कायल हुआ करते थे।
उनके बेटे अनूप जुत्शी ने कहा, “सात जून को उनकी कोरोना वायरस की जांच रिपोर्ट दोबारा निगेटिव आयी जिसके बाद हम उन्हें घर वापस ले आये। आज लगभग दोपहर ढाई बजे हमने खाना खाया और उसके बाद उनका निधन हो गया। ”उन्होंने कहा, “वह काफी बूढ़े थे और संक्रमण के कारण काफी कमजोर भी हो गए थे। डॉक्टरों का मानना है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा होगा। ”
गुलजार देहलवी के कुछ प्रमुख शेर!
नज़र झुका के उठाई थी जैसे पहली बार ,
फिर एक बार तो देखो उसी नज़र से मुझे!
जरूरत है उन नौजवानों की हमको..
जो आगोश में बिजलियों के पले हों,
कयामत के सांचे में अकसर ढले हों,
जो आतिश फिजा की तरह भड़के,
जो ले सांस भी तो बरपा जलजले हों’
वो कहते हैं ये मेरा तीर है ज़ां ले के निकलेगा,
मैं कहता हूं ये मेरी जान है मुश्किल से निकलेगी!!



