कोरोना के बीच अंतिम वर्ष के परीक्षार्थियों की परीक्षा होनी है, लेकिन इस पर भी विवाद चल रहा है। कुछ राज्य अभी परीक्षा कराने के लिए तैयार नहीं हैं। कोरोना के बीच फाइनल ईयर की परीक्षाएं कराने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक अर्जी पर फैसला सुनाया गया। जिसमें कोर्ट ने कहा कि यूजीसी की 6 जुलाई की गाइडलाइंस को सही माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को परीक्षा रद्द करने का अधिकार है लेकिन स्टूडेंट्स बिना परीक्षा दिए प्रमोट नहीं होंगे। हालांकि मौजूदा हालात में डेडलाइन को आगे बढ़ाने और नए तारीखों के लिए राज्य यूजीसी से सलाह ले सकते हैं।
Supreme Court upholds the University Grants Commission's July 6 circular to hold University final year exams.
Court says States must hold exams to promote students. It says states under Disaster management Act can postpone exams in view of pandemic & can consult UGC to fix dates pic.twitter.com/EcLcgLuRIz
— ANI (@ANI) August 28, 2020
यह फैसला इसलिए उचित है क्योंकि यूनिवर्सिटी और दूसरे हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की फाइनल या सेमेस्टर की परीक्षाओं को 30 सितंबर तक कराने की यूजीसी की गाइडलाइन को चुनौती देने वाली अर्जी पर 18 अगस्त को सुनवाई हुई थी लेकिन उस दिन कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस दौरान महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और उड़ीसा की दलीलें भी सुनी गई। इन राज्यों ने परीक्षा रद्द करने का फैसला खुद ही ले लिया जिसको यूजीसी ने फैसले के खिलाफ बताया था।



