नवजोत सिंह सिद्धू के व्यक्तित्व में अब ग्रहण लग चुका है। ना तो नवजोत सिंह सिद्धू की पार्टी में कोई अहमियत बची है और ना सत्ता में कोई पद मिलने की व्यवस्था है। कल तक उन्हें कांग्रेस का भविष्य बताने वाले हरीश रावत जी आप अपने बयान से पलट चुके हैं और वे कह रहे हैं कि फ़िलहाल नवजोत सिंह सिद्धू के लिए कांग्रेस पार्टी या पंजाब सरकार में कोई भी भविष्य नहीं है! नवजोत सिंह सिद्धू एक ज़माने में भारतीय जनता पार्टी का एक कद्दावर नेता लेकिन आज कांग्रेस में आने के बाद उनकी जो दुर्गति हुई है हर कोई परिचित है। ऐसा हो रहा है क्योंकि पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू अपनी पार्टी की रैली में अपनी पार्टी के नेताओं और मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर निशाना साधते हुए नजर आए हैं।
पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने कहा था कि पंजाब कांग्रेस की कमान सुनील जाखड़ ने अपने हाथ में ले ली है और पंजाब सरकार में उन्हें ना लेने या लेने का फैसला अमरिंदर सिंह के हाथों में है। ऐसे में आज की तारीख में नवजोत सिंह सिद्धू के लिए न तो पार्टी और ना ही सरकार में कोई भी स्थान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में उनका बेहतर उपयोग किया जाएगा। रावत का यह बयान राहुल गांधी की पंजाब में खेती बचाओ यात्रा के खत्म होने के बाद आया है। इससे पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कि संगठन के विस्तार के समय भी नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी में अहम पद देने की बात चल रही थी, लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ ना सिद्धू को सरकार में वापस दिया गया और ना ही उन्हें पार्टी में कोई अहम पद दिया गया।
वहीं कुछ दिनों पहले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मास्टर मोहन लाल ने दावा किया था कि जल्द ही नवजोत सिंह सिद्धू एक बड़ा फैसला लेंगे और घर वापसी करेंगे। यहां घर वापसी का मतलब है भारतीय जनता पार्टी में वापस आना। उन्होंने कहा कि सिद्धू का उद्धार भाजपा में ही होगा। कांग्रेस में सिद्धू का कोई भविष्य नहीं है। वे एक ईमानदार नेता है और उनके लिए भाजपा ही एकमात्र उचित मंच है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सिद्धू बहुत जल्द भाजपा में एंट्री करेंगे और 2022 में भाजपा से चुनाव भी लड़ेंगे।
नवजोत सिंह सिद्धू ने सन 2004 में सियासत में कदम रखा था और भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल के फूल पर चुनाव लड़ा और जीत गए 1988 के गैर इरादतन हत्या मामले में घिरे, 2006 में उन्हें 3 साल के लिए कैद की सजा सुनाई गई। 2007 में उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दिया। 2007 में ही सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाई और फरवरी 2007 में उन्होंने एक बार फिर भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा 2009 में भी में लोकसभा से जीते हैं।
इसके बाद 2014 में सिद्धू को भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा का टिकट ने ही दिया उनके स्थान पर और जेटली ने चुनाव लड़ा और अरुण जेटली वहां से चुनाव हार गए। इसके बाद सिद्धू की भाजपा से नाराजगी शुरू हुई। सिद्धू को 2016 में राज्यसभा भेजा गया लेकिन भी खुश नहीं हुए आखिरकार राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने 2016 में भाजपा छोड़ी। और आवाज ए हिंद पार्टी बनाई जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम। कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा अच्छे वोटों से जीत दर्ज की और उसके बाद उन्हें स्थानीय निकाय मंत्री बनाया गया। कुछ समय बाद उनके मंत्रालय में फेरबदल हुआ जिसके बाद सिद्धू नाराज हुए और वर्ष 2019 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। और तब से वे एक अज्ञातवास में चल रहे हैं।



