सुप्रीम कोर्ट: शाहीन बाग जैसी सार्वजनिक जगहों का घेराव बर्दाश्त नहीं, ऐसे मामलों में अफसर खुद करवाई करें

शहीन बाग मामले सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बयान देते हुए कहा है, "इसे खाली कराने के लिए दिल्ली पुलिस को खुद कार्रवाई करनी चाहिए चाहिए, कोर्ट के पीछे नहीं छिपना चाहिए।"

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शाहीन बाग मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बयान जारी किया है। शाहीन बाग मामले पर सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख जज संजय कोल ने कहा है कि किसी भी सार्वजनिक स्थान को घेरकर इतने समय तक धरना नहीं दिया जा सकता। आप सभी जानते हैं कि शाहीन बाग़ में प्रदर्शन को लेकर लगातार 3 महीने से ज्यादा समय तक एक प्रमुख सड़क को घेरा गया था। जिसके कारण बहुत सारे लोगों को आने जाने में परेशानी हो रही थी। इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने चार प्रमुख बातें कही है:

1. विरोध प्रदर्शन के लिए शाहीन बाग जैसी जगहों का गिरा बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
2. लोकतंत्र और असहमति एक साथ चल सकते हैं।
3. शाहीन बाग को खाली कराने के लिए दिल्ली पुलिस को कार्यवाही करनी चाहिए थी।
4. अफसरों को खुद एक्शन लेना चाहिए, वे अदालतों के पीछे नहीं छिप सकते, कि जब कोई आदेश आएगा तब ही कार्रवाई करेंगे।

वकील अमित साहनी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने से पहले 21 सितंबर को कहा था, ” विरोध के अधिकार और जनता की आवाजाही के बीच में बैलेंस होना चाहिए।” नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में देशभर के विभिन्न स्थानों के साथ-साथ शाहीन बाग में भी 15 दिसंबर, 2019 को धरना शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली-नोएडा मार्ग पर जमावड़ा लगा दिया जिससे कालिंदी कुंज से होकर नोएडा से दिल्ली और फरीदाबाद आने-जाने वाले लाखों लोगों को महीनों तक परेशानी हुई। इन्हें कई किलोमीटर व्यर्थ ही आना-जाना पड़ रहा था। वहीं, इस मार्ग के बंद होने के कारण रिंग रोड, मथुरा रोड और डीएनडी पर यातायात का अतिरिक्त दबाव पड़ा। इस कारण इन मार्गो पर भयंकर जाम लगता रहा। इसी बीच भारत में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम हुआ था जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए थे। और उसी दिन से देश भर के कई हिस्सों में दंगा हुआ। कुछ लोगों ने शाहीन बाग को भी दंगों में भागीदार बताया है।

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